अच्छी मम्मी कैसे बने

हर माँ चाहती है की वह अपने बच्चे के लिए दुनिया की सबसे अच्छी माँ बने।  इसके लिए वह हर बनती कोशिश करती है लेकिन बहुत बार ऐसा होता नहीं है।  आप उस बच्चे के लिए हर काम हर वो चीज कर रही है।  जिससे उसकी नजरो में आप एक प्यारी मम्मी बने लें फिर भी बच्चा खुश नहीं है , बल्कि और ज्यादा चिड़चिड़ा हो गया है , और जिद्दी हो गया है , तब आपको समझ जाना चाहिए की बच्चे को हर वह चीज उपलब्ध करा देना जो उसके मुँह से निकली हो यह सही नहीं है।  बच्चा अपनी माँ के साथ पूरा दिन बीतता है वही उसकी रोल मॉडल होती है तो ऐसे में आपको बहुत ध्यान देना है की आप अपने बच्चे के सामने कैसा बर्ताव कर रही है।  क्यूंकि बच्चे जैसा देखते है व बिलकुल वैसे ही बनते चले जाते है उन्हें सीखना नहीं पड़ता है इसलिए आप बच्चे को शांत , खुश व समझदार बनाना चाहती है तो आपमें खुद इन गुणों का होना बेहद जरुरी है।  आइये आज हम आपको एक अच्छी मम्मी कैसे बने इसके लिए कुछ टिप्स देते है।

१) बचपन से ही छोटी छोटी जिम्मेदारियां सिखाये

हमें बच्चो को बचपन से ही उनके लायक काम करने देने चाहिए जैसे छोटे पैन से ही उसे खुस खाने दे भले ही वह गिराएगा लेकिन अपने हाथो से खाना तो सिख जाएगा।  अपने जूते चप्पल जगह पर रखे , अपने कपडे fold करे।  ऐसे अनेको काम होते है , जिन्हे बच्चा बचपन से करता जाता है तो उसमे भी जिम्मेदारी आती है और वह काम करना भी सिख जाता है। 

२) बच्चो को जरुरी और गैरजरूरी चीजों में भेद समझाइये

जैसे बच्चे को हर वह चीज जो वो दुसरो के पास देखता है वह उसे चाहिए होती है वह यह नहीं देखता की वास्तविकता में उसे वह जरुरत है भी या नहीं।  इसलिए आप उसे जरुरी और गैरजरूरी चीजों का अंतर समझाइये की तुम्हे वाकई में उसकी जरुरत है भी या नहीं।  इससे बच्चे भी फिजूल खर्चो की भी आदत नहीं पड़ेगी।  व वह चीजों की अहमियत समझेगा जैसे बच्चे ने दूसरे के यहाँ कई खिलौना देखा लेकिन उसके पास वह नहीं लेकिन अनेको खिलोने है तो भी वह उसे लेने की जिद करता है तो उसे समझाइये की हमारे पास तो अनेको खिलोने है और बहुत से असमर्थ बच्चो का उदहारण देकर बताये की बहुत बच्चो को तो वह भी नहीं मिलता इस लिए जो हमारे पास है उसमे खुश रहे।  और बहुत ही जरुरी चीज हो तो ही लेवे। 

३) सेविंग करना सिखाये

बच्चो को शुरू से ही पैसो की बचत करना सिखाये।  उसे १ पिग्गी बैंक लेकर दे और कहे की इसमें वह बचत करे जैसे की उसे बर्थडे पर जो पैसे मिलते है relative जो उसे पैसे देते है वह सब वह इसमें जमा करते जाये और बाद में इसे वह अच्छी जगह use कर सके ! बड़े बच्चे है आप इन्हे पैसे देकर सामान लेन भेजते है तो उसे समझाइये जितना जरुरत का सामान है वही लाये।  चॉकलेट या कोई गेम वगैरह न लाये पैसे बराबर बचा कर वापस लाये यह सिख दीजिये। 

) बच्चो की बातें सुने

अक्सर क्या होता है की जब बच्चे स्कूल से आते है या खेलकर आते है उन्हें वह हर बात जो उसके साथ हुयी है वह जाकर अपनी मम्मीयो को बतानी होती है पर मम्मी अपने कामो में व्यस्त रहती है।  वह उसकी बातो पर अच्छे से ध्यान नहीं देती ऐसे बच्चे को बहुत बुरा लगता है और वह फिर या तो किसी और से जो उसकी बाटे सुनता हो उसे अपनी बातें बताने लगता है या आपसे बातें छुपाने लगता है।  फिर बाद में आपको बुरा लगता है की इसमें मुझसे ये बात क्यों छिपाई इस लिए जब भी बच्चे कुछ बताने आये तो २ मिनट के लिए काम छोड़कर उसकी बाटे सुने।  इससे आपका और बच्चे का बांड भी अच्छा बनता है। 

५) रोजमर्रा के कामो में मदद ले

हम मम्मिया जब तक हम अच्छी रहती है तो सुपरवुमेन की तरह काम करती चली जाती है और बच्चो , पति सबको  हाथ में सब चीजे पकड़ती है , और फिर यही आदत लग जाती है।  मुश्किल तो उस दिन आती है जब आपकी तबियत ख़राब हो जाती है और वह अपना छोटा छोटा काम भी नहीं कर पाते अपने आप स्कूल के लिए रेडी नहीं हो पाते , अपना बैग नहीं अर्रंगे कर पाते अपने shoes  proper  से नहीं पहन पाते।  खुद से खाना लेकर नहीं खा पाते तब आपका दिमाग ख़राब हो जाता है की एक तो मेरी तबियत ठीक नहीं है और तुम लोग छोटा छोटा सा काम भी नहीं कर पाते।  इसलिए रोज ही उन्हें उनके लायक काम करने दे ताकि वह उनकी आदत में रहे फिर किसी दिन जब आप न हो तब भी वह आसानी से अपना काम कर सके व दुसरो की भी मदद कर सके। 

६) अपनी इच्छा की पूर्ति बच्चो से न करवाए

जैसे की कुछ महिलाये जिन्हे डांसिंग व सिंगिंग का बहुत शौक होता है और वह बचपन में बहुत अच्छे से परफॉर्म करते थे लेकिन जैसे जैसे बड़े हुए उनकी यह इच्छा / शौक कही छूट गया तो माये अपनी इच्छा बच्चो के माध्यम से पूरी करना चाहती है की मई तो भाई dancer ही बनाउंगी ! बच्चे की रूचि में ध्यान दे की वह किस field में अच्छा है उसे वह करने दे, क्यूंकि आपकी थोपी गयी इच्छा वह कभी भी अच्छे से नहीं पूरी कर पायेगा।  उसे अपनी खुशिया खुद ढूंढने दे व उसे सही रह दिखाए। 

७) बच्चो के सामने फालतू gossip न करे

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कभी भी माये इस बात का ध्यान रखे की वह जब भी किसी के बारे में कुछ निंदा कर रही हो तो वहां उसका बच्चा उसे सुन जा रहा हो क्यूंकि बच्चे ऐसी बातो को बड़ी ही ध्यान से सुनते है व उस इंसान जिनकी बात हो रही है उसके लिए अपने मन में गलत धरना बना लेते है की भाई यह तो गलता इंसान है व कई बार तो उनके सामने बोल भी देते है की आपने मेरी मम्मी के साथ ऐसा क्यों किया तब आपको बहुत बुरा लगता है इसलिए ऐसी निंदा कभी भी बच्चो के सामने न करे। 

८) बच्चो के सामने अपनी weakness न जताये

कई बार महिलाये जिन्हे कुछ चीजों या परिस्थितियों से डर लगता है वह खुद ही उस समय डर जाती है या घबरा जाती है की अब क्या करे ऐसा आपका व्यव्हार जब वह बच्चा देखता है तो वह सोचता है की आप खुद ही डर्टी है और हमें हर परिस्थिति में स्ट्रांग रहने को बोलती है , इसलिए वह फिर समझ नहीं पता की क्या सही है की क्या गलत ! इसलिए हमेशा जब बच्चा सामने हो और ऐसी कोई परिश्थिति आये तो उसका सामना डट कर करे जिससे आपका बच्चा भी निर्भीक होकर कैसे कठिनाइयों का सामना करना है वह सीखता है व उसमे मन में आपके लिए रेस्पेक्ट बढ़ जाती है की मेरी मम्मी कितनी बहादुर है। 

९) अपनी गलती होने पर सॉरी जरूर बोले

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१०) गुस्से में कण्ट्रोल करना सीखिए

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हम अक्सर बच्चो से यह अपेक्षा रखता है की अगर वह गलती कर रहे है तो हमसे तुरंत आकर ‘sorry ‘ बोले।  लेकिन जब हम गलती करते है तो हम तो उन्हें sorry नहीं बोलते।  तो ऐसे में सामने वाले से अपेक्षा रखना भी गलत है।  बच्चा अगर देख रहा है की मम्मी भी कभी कुछ गलती होने पर sorry बोल रही है तो वही आदत व संस्कार बच्चो को भी आते है और वह भी sorry बोलता है इसलिए अगर आप कुछ सीखना चाहती है बच्चो को तो उसे अपनी आदत बनाये ताकि बच्चे अपने आप वह सिख जाये। 

यदि आपको कभी बहुत गुस्सा आता है।  और उस वक़्त आप बहुत चीख चिल्ला रही है और बच्चो के ऊपर हाथ भी उठा रही है तो यह बहुत ही गलत है।  आगे चल कर यही आचरण आपका बच्चा भी करेगा।  इसलिए जब भी गुस्सा आये तो उस परिश्थिति में अपने गुस्से को हावी न होने दे व बच्चो को उनकी गलती होने पर शांति से व प्यार से समझाए।  गुस्सा करना की हल नहीं है व वह situation को बिगाड़ता ही है। 

११) आपका प्यार कंडीशनल नहीं होना चाहिए

हम माये कई बार जब बच्चे में बहुत अच्छा काम किया है या अच्छे मार्क्स लाये है तब हम उसकी बलैया लेती है व बहुत प्यार करती है लेकिन अगर उसके मार्क्स काम आये है या वह कभी अच्छा परफॉर्म नहीं कर पता तो उस समय दिलासा देने की बजाये हम इस पर दोष लगाती है की तुमने अच्छा परफॉर्म नहीं किया या पढाई नहीं की इस लिए तुम्हारे मार्क्स काम आये है इस समय आपका फ़र्ज़ है की उसे समजाय   की ऐसा क्यों हुआ और आगे क्या सावधानी रखे की और अच्छा result आये । जब कभी बच्चा बहुत low feel कर रहा तो उस समय उसे आपके support की ज्यादा जरुरत है की आपके गुस्से की। 

१२) हर बात में ‘ना’ नहीं बोले

आप अगर बच्चा कुछ मांग रहा है या जिद कर रहा है की मुझे यह चाहिए ही चाहिए तब आप यह तो मै तुम्हे बिलकुल नहीं दूंगी ऐसा कहेंगे तो बच्चो को बहुत गुस्सा आता है ऐसा करने की बजाये अगर आप उसे कहे की इसकी जग़ह ये ले लो यह तुम्हारे ज्यादा काम की चीज़ है वह हम बाद में ले लेंगे तो वह इतना गुस्सा नहीं होंगे इसलिए एकदम से ना कहने की बजाय उसे दूसरा option  दीजिये या ध्यान दूसरी तरफ बता दीजिये।

१३) बच्चे की हर बात ना माने

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आप अगर बच्चा कुछ भी जिद कर रहा है और आप आप उसे तुरंत पूरा कर दे रही है तो यह बिलकुल ही गलत है बच्चे को पता चल जाता है की मै अगर थोड़ा रोऊँगा या ड्रामा करूँगा तो मुझे मम्मी वह चीज दे ही देंगी।  फिर वह हर वह चीज जो जरुरी ना भी हो उसके लिए भी मांग करेगा।  तब आप क्या करेगी ? इस लिए बच्चे की मांग / बात अगर जायज है तभी मने अन्यथा ना कह दे।  या ध्यान बता दे।  हर चीजों में मनमानी करने देने से बच्चे में सही / गलत , जरुरी – गैर जरुरी चीजों की समझ नहीं आती है , इस बात का ध्यान रखे। 

१४) अच्छी inspiring  कहानिया सुनाये

आप जब भी बच्चे के साथ वक़्त बिताती हो जैसे नाईट में आप पुरे दिन का हाल उससे पूछती हो या जब भी आपका उसके साथ टॉक टाइम हो तब उसे उसकी अच्छी – अच्छी कहानिया सुनाये वह कहानिया inspiring  होनी चाहिए तथा उससे उसे अच्छी सिख मिले ऐसा आपका उद्देश्य होना चाहिए।  बच्चे कहानिया बहुत एन्जॉय करते है व उनसे सीखते भी है। 

१५) बच्चो में sharing व helping की आदत डाले

बच्चो को बचपन से ही शेयर करना सिखाये और लोगो की मदद करना भी सिखाये क्यूंकि आप खुद ही बहुत बार उसे बोलती है की यह चीज किसी को मत देना और वास् बच्चा यह ही समझता है की मेरी मम्मी ने तो यह किसी को भी ना देने को बोलै है तो वह उसके लिए पत्थर की लकीर बन जाती है उसकी बजाये यह सिखाये की अगर तुम्हारे पास जो चीज है और किसी को उसकी सही में जरुरत है तो उसे भी थोड़ा शेयर करे व लोगो को जरुरत है तो उसे भी थोड़ा शेयर करे।  इससे उसमे अच्छे संस्कार आते है। 

निष्कर्ष

अगर आप सही मायने में चाहती है की आप एक अच्छी माँ साबित हो तो आपको अपने बच्चे की परवरिश में बहुत सी बातो का ध्यान रखना होगा , जिससे ना केवल बच्चा ही बोलेगा की आप उसकी बेस्ट मम्मी है बल्कि आसपास के लोग भी कहेंगे की वाह यह कितनी अच्छी मम्मी है।  हमको इनसे सिख लेनी चाहिए ।  आज के इस blog में आपको काफी ऐसे tips  मिलेंगे जिससे आप रोज़ की लाइफ में अपनाकर अच्छी मम्मी बन सकती है।  अंत तक blog पढ़ने के लिए धन्यवाद् ! फिर अगले blog  में मिलेंगे तब तक के लिए अपना और अपनों का ध्यान रखे। 

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